कहते हैं,
जाती धर्म पर देश टुकड़ों में बँटा हुआ है,
मगर आज मैं सोचने पर मजबूर हूँ,
कोन है जो आज देश जला रहें हैं,
किस जाती के हैं ये लोग,
इन्हें हिन्दू कहूँ, मुस्लिम कहूँ, सिख कहूँ, या कुछ ओर,
ये ना राम के रखवाले हैं ना रहीम के,
इन्हें अपना कहूँ या अपने देश में छिपे ग़द्दार,
आज अपने देश में शूट ऐट साइट के ऑर्डर,
कुछ अजीब लगता है, नहीं बहुत अजीब,
ऐसे लोग बाबा तो नहीं हो सकते,
ओर ना वो पत्थर बाज़ अन्ध्भक्त हो सकते हैं,
ये सब षडियंत्र है,
अभी तो सिर्फ़ दो बाबाओं ने देश की नीव हिला कर रखी है,
ऐसे जाने कितने बाबा मोलवी ओर तरह तरह के साँप,
देश में छिपे बैठे हैं,
ये देश के दीमक हैं,
धीरे धीरे देश को खोखला कर रहें हैं
अब भी अगर भोली भाली जनता,
इन झूटे बाबाओं के लिए अन्ध्भक्त बनी रही,
तो ये देश विकसित तो छोड़ो विकाशशील भी नहीं रहेगा।