बचपन's image
बचपन की उछल कूद ओर भोली नादानियाँ, याद है मुझे अभी चोरी छुपे की हुई शेतानियाँ, सुबह सुबह बेट बोल ले निकल जाते थे घर से, फिर दौड़ते आते करते स्कूल जाने की तैयारियाँ, बढ़ई लकड़ी को तराश कर रोज़ अच्छे से सँवारता, याद मुझे निहारना रास्ते भर की रंग-बिरंगी दुनियाँ, मोर पंख किताब में रखकर पास होने की उपासना, गणित का
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