बस तू दोस्त के जैसा लगता था ,
तू अपने जैसा लगता था।।
तेरी हसीं में पाकीज़गी थी ,
एक सितारे सी झलक तुझमें थी ,
हुनर ना तेरा कोई समझ पाया ,
ये दुनिया तेरे लिए छोटी थी ,
तू जिन तारों को देखा करता था ,
उनमें ही चला गया ?
बिना तंज़ कसे ,चुपचाप , बिना किसी आवाज़ के ,
इस जहां को छोड़ गया।।
लेकिन तुझे बताऊं मैं ,
तुझे देख के हिम्मत मिलती थी ,
तू अपना सा लगता था ,
तू दोस्त के जैसा लगता था।।
तू गया तो सब सूना लगता है ,
तू नहीं आयेगा, सोच के दिल धक्क सा रह जाता है।।
अब जहां है तू शायद वहां ना कोई ग़म होगा।।
वहां ना कोई शिकवे होंगे ।।
एक मंद सी मुस्कान लिए ,
अब आराम से सो जाना तू ।।


