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ख़लिश


ख़लिश जज्बातों की बयाँ करते है हम अफसानों के जरिये... यही तो जरिया है तुमसे मिलने का, कई दिन हुए छुआ नहीं तुम्हें मुलाकातों के जरिये.....

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