Maa By Anjum Lucknowi's image
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माँ

यतीमी खूँ रुलाती है बदन बेजान लगता है । 

ना हो जिस घर में माँ वह घर मुझे वीरान लगता है । 


मैं सच कहता हूँ माँ के पाक आंचल की क़सम खाकर ।

मुझे तो माँ का चेहरा इश्क का कुरआन लगाता है । 


मुझे लगती है जब ठोकर तड़प जाती है मेरी माँ ।

 जवानी में भी मादर को पिसर नादान लगाता है ।


 मेरी माँ भूकी प्यासी बैठी रहती है मेरी खातिर । 

मैं जब घर लौट आता हूं तो दस्तरख्वान लगता है ।


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