कई ज़ख़्म लगें हैं कई फ़िर से हरे हुए हैं।
हम कई चौखट कई ठौर पे ठहरे हुए हैं।
तेरी बातों पे यकीं ना हो तो माफ़ करना।
हम दिल टूटने के एक दौर से गुजरे हुए हैं।
©Anjanii Singh


कई ज़ख़्म लगें हैं कई फ़िर से हरे हुए हैं।
हम कई चौखट कई ठौर पे ठहरे हुए हैं।
तेरी बातों पे यकीं ना हो तो माफ़ करना।
हम दिल टूटने के एक दौर से गुजरे हुए हैं।
©Anjanii Singh