Poetry 1 min read 597.7K reads

ख़ाक़


उसने इस अंजाम तक बखूबी निभाया था ।ख़ता उसकी नही कि मुझको आवाक कर दिया ।

मैं भी एक शय था उसके बाकी खिलौनों की तरह ।दिल बहलाया तोड़ा और फिर ख़ाक़ कर दिया।

— Anjani Kumar Singh (Theinnervoice )
Read more Earn more Learn more