सड़क पर गाड़ी ऐसे दौड़ाते हो,
जैसे सड़क तुम्हारे पापा की है"
दूसरों को टक्कर मारकर भागते हों जैसे
पीछे कोई पागल कुत्ता पड़ा हो।
कहाँ चली गई तुम्हारी वो
समझदारी,कहाँ छुप गई तुम्हारी
वो दिखावे की भक्ति?
तड़पते हुए इंसान को सड़क पर
छोड़ते समय,जरा भी काँपी नहीं
तुम्हारी ये हस्ती?
तुम्हें क्या परवाह कि जिसका
एक्सीडेंट किया वो जिंदा भी
बचा है या नहीं,
मन में बस यही घमंड है न, कि
मरने वाला कोई तुम्हारे घर का
थोड़ी था।
