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किस्से पुराने


दास्तां हमारी, फसाने हमारेहक़ीक़त पसंद नहीं जमाने को,

बनाते है यूं ही बहानेटूटी हुई तारों से नहीं निकलते तराने,

साज से जब साज मिलेतभी सुनते हैं लोग किस्से पुराने....

— अनीता
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