ज़िंदगी गर कट गईयाद में या भुलाने मेंबर्बाद हो जायेंगे ये चार दिनबस फिर इसी ख़्याल में
ज़िंदगी गर कट गईयाद में या भुलाने में
बर्बाद हो जायेंगे ये चार दिनबस फिर इसी ख़्याल में