न जाने कितने गम बांटे है तुम्हारे इस पत्र ने ! श्याही भी मिट गई है अब तो नज़र नहीं आता कुछ भी ! पर दिल जो पढ़ना चाहता है पढ़ ही लेता है ! छुपा कर रखता हूँ हर पल ना जाने क्यूं डरता है दिल तुम कब आओ और ले जाओ इसे ! माना ये कुछ भी नहीं है तेरे लिये पर मेरी तो ज़िन्दगी है ये !