तेरे कदमों के निशानो पे हम, रखके कदम चलते हैं
होके रूखसत तेरी महफिल से, मेरे सनम चलते हैं
तेरे साये से लिपटे हुए, कई सदियां गुजारी हैं हमने
हमको दे तू इजाजत जरा अब, होके हम बेदम चलते हैं
तन्हाईयाँ रूलायेगीं अब तो, हूँ वाकिफ मै इस बात से भी
अब मिलेंगे सितारो के जहाँ मे, ये खाके कसम चलते है
करना इंतजार रातों को अब तो, अक्सर ख्वाबों मे आया करेंगे
ना करना रिहा यादों से अपनी, करना थोडा करम करते हैं
थी उम्मीद रूखसत करेगा, अपने हाथों से मैयत मेरी वो
ना भूलेगा वो वफाओं को मेरी, ये ले के भरम चलते हैं
ये नज्म ये गीत ये गजलें, तुझको तोहफा है मेरी वफा का
सिवा तेरे कुछ लिखा ना लिखेंगें, उठा अपनी कलम चलतें हैं


