चल तु, बढ़ तु, न रुक तु

अनायास जो मिले, न कर उसे उसे स्वीकार तु

चल तु, बढ़ तु, न रुक तु

सफलता की राह में, जो है बाधाएं अनेक

उखाड़ फेंक उन बाधाओं को, कर एक - एक

चल तु, बढ़ तु, न रुक तु

सागर रूपी इस जीवन में, हैं समस्याओं के लहरें कई

यह सागर, हैं इसमें छुपे राज कई

यह जीवन, हैं इसके अंदाज कई

कभी दुख, दर्द और वेदना

कभी सुख, हर्ष और संवेदना

चल तु, बढ़ तु, न रुक तु

परिस्थितियां हों जब विपरीत, न हो उदास तु

हुआ जो कभी तु असफल, न हो निराश तु

मिले न जब तक तुझे मंजिल, न कर आराम तु

चल तु, बढ़ तु, न रुक तु।।