तू होती तो मज़ाक उड़ा रही होती, मेरी इन बिखरी बातों का फिर यूंही अचानक से, मेरे करीब आकर, मुझे थाम लेती, मेरा बाल सहलाती, और कंधे पे मेरे सर रख, कहीं अपनी ही दुनिया में गूम हो जाती। तेरे जैसी पहेली, कहीं देखी ही नहीं मैंने, इतनी खूबसूरत की, डूब कर भी इतराए डूबने वाला। क्या शिकायत करूं तुझसे, की तू मेरी नहीं... मैंने देखा है, उन्न आंखों में जहां भर की सच्चाई, इन्हें अपने बाहों में समेटने की हैसियत मेरी ही नहीं। तू ख्वाब है उस रात की, की जिसे सिर्फ एक चादर चांदनी की, और एक मोहरा वो चांद भी, शायद ही इक्कट्ठा कर सके। तू मेरी अरमानों की वो सोने की सूई है, जो सपने तक की ही हकीकत है। तुझे  इंसानों की दुनिया में, इंसानों के ऊपर मेहरबानी सा उतारा गया था। एक ऐसी मिसाल की, खुदा ने इंसानों से अपनी मोहब्बत ज़ाहिर करने के लिए, अपना सबसे प्यारा फरिश्ता , कुराबान कर ज़मीन भेज दिया।