सब हमारे फिक्रमंद यहां, हर एक ने की रुसवाई है।दोष कोई पत्थरो को क्या दे, जब ठोकर फूलों से खाई है।
सब हमारे फिक्रमंद यहां, हर एक ने की रुसवाई है।
दोष कोई पत्थरो को क्या दे, जब ठोकर फूलों से खाई है।