Poetry 1 min read 789K reads

पगड़ी


''बात बुजुर्गों की पगड़ि पे रुकी थी वरना,,,

हमने कोई कसर नहीं छोड़ी तुम्हे चाहने में..!!!''

— नि:शब्द
Read more Earn more Learn more