तु गली बनारस की...मैं आवारा सा नथीयारा...


तु गंगा की बहती धारा... मैं तिनका सा पानी का प्यासा...


तु समुन्दर का कोई घाटा... मैं हर श्याम डूबता सा आफता...


तु इश्क की मारी..मैं तेरे इश्क में मारा दीवाना सा..


तु सफ़र थोडा लम्हा सा,मैं भटकता तेरी राहों में बंजारा सा...


तु तराशा गया नुर का छल्ला, मैं मशहूर सा कारीगर..


तु झपती माला कान्हा की, मेरे मुख से निकले हर शब्द...राधे राधे..


~नि:शब्द