वहीं उम्मीद है,वहीँ आरजू है,
वहीं रात है,वहीं ख्वाब हैं,
जिंदगी एक थीं,मकान हजार हैं,
कोई खरीददार है, तो कोई किरायेदार हैं।
उस पत्ते की ख्वाईश है कि,
ना हिज्र पाऊँ इस पेड से,
लेकिन रफ़्ता रफ़्ता पानखर आना,
यहीं जिंदगी का मौसम-ए-बहार हैं ।।


वहीं उम्मीद है,वहीँ आरजू है,
वहीं रात है,वहीं ख्वाब हैं,
जिंदगी एक थीं,मकान हजार हैं,
कोई खरीददार है, तो कोई किरायेदार हैं।
उस पत्ते की ख्वाईश है कि,
ना हिज्र पाऊँ इस पेड से,
लेकिन रफ़्ता रफ़्ता पानखर आना,
यहीं जिंदगी का मौसम-ए-बहार हैं ।।