तेरी यादों से जब बिछड़ जाती हूँ मैं यू लगता है तन्हा हो जाती हूँ मैं तेरी जफ़ाओं का सिला जब भी जफ़ाओं से देती हूँ तेरे ख्यालों से मुकर कर जिन्दगी किराये सी लगती है हवाओं के झोंको पे बनी आशियाने सी लगती है तेरी यादों से जब बिछड़ जाती हूँ मैं यू लगता है तन्हा हो जाती हूँ मैं तेरी दूरीयों का सिला जब भी दूरीयों से देती हूँ इन फासलों पे चलकर जिन्दगी समन्दर सी लगती है लहरों के झोंको में बिखरती रेत सी लगती है तेरी यादों से जब बिछड़ जाती हूँ मैं यू लगता है तन्हा हो जाती हूँ मैं