गुड़ियो से खेलती एक गुड़िया गई है माँ के आँचल की एक दुनिया गई है आज फिर किसी हवसी का शिकार एक मुनिया हुई है कुछ ना हासिल होगा आक्रोश जताने से और कानून बनाने से सोचो जिस कोख से जन्मी है द्रौपदी क्यो पैदा होता है दुशासन उसी कोख से बदलना है तो बदलो अपनी सोच को कुछ ना होगा शोक मनाने से सिखाते हो बेटों को दुर्गा सरस्वती और लक्ष्मी को नमन करना जरा उनको बताओ उन्हे जिन्दगी मे भी अमल करना नरी कोई सामान नहीं वो सम्मान है समाज का सिखाओ उनको भी उनका कदर करना