उससे बहुत प्यार किया,
दिन रात सपने देखे,
जब कभी दीदार हुआ,
मन खुशी से,
ओत प्रोत हुआ।
ये दीदार,
घंटों दिमाग में रहता,
उसकी एक एक अदा,
बहुत विचलित करती,
परम सुख देती,
मैं आनंद विभोर हो जाता,
स्वर्ग के सुख जैसा एहसास पाता।
आज वैलंटाइन,
सुबह सुबह,
घर के गार्डन में गया,
एक संपूर्ण खिला हुआ,
गुलाब टहनी के साथ तोड़ा,
उसे खुबसूरती से सजाया।
फिर धीरे से,
उसके घर की और निकला,
जैसे ही उसने दरवाजा खोला,
झट से लाल गुलाब,
उसके सामने रखा,
वो खिलखिलाई,
वाह मेरे वैलंटाइन,
वोल के मुस्कराई,
मेरी प्रेम कहानी बन आई।
