गुलामी एक ऐसा अभिशाप है।जो मानव में हिन भावना भर देता है।मानव का अपने उपर विश्वास टूट जाता है।वो जहां भी जाता है।उसे किसी का अधीन समझा जाता है।यही गुलामी हमारे देश‌ भारत ने भी झेली।हमारे लोगों के कोई अधिकार नहीं थे।हमारे उपर ब्रिटिश संसद का कानून चलता था।हमारे लोगों को युनियन जैक के सामने झुकना पड़ता था।अंग्रेज मनमाने ढंग से जो चाहे करते थे।उनका हर कदम अपने देश ब्रिटेन के लिए हितकारी होता था।हमारे देश की सारी संपत्ति लुटकर वो ब्रिटेन ले जाते थे।हमारे यहां जान बुझकर पिछड़ापन रखते थे। जिससे वो अधिक से अधिक हमें अपना गुलाम रख सकें। वो कहावत सच हुई।कि जब पाप का घड़ा भर जाता है।तो वो फट जाता है।हमारे यहां पर भी जो अत्याचार लोगों पर होते थे।लोग उनसे तंग आ चुके थे।धीरे धीरे छूटपुट विद्रोह शुरू हो गये। लेकिन वो संगठित न‌ होने के कारण कुचल दिए गए। परंतु भारत की मिट्टी ऐसी मिट्टी है।कि अगर अंग्रेज़ एक विद्रोह कुचलते।तो उससे दुगुने पैदा हो जाते।अब स्वतंत्रता सेनानी संगठित होने लग पड़े। उन्होंने संगठित होकर।पहली स्वतंत्रता की लड़ाई 1857 में लड़ी। लेकिन कहते हैं।कि ये लड़ाई योजनाबद्घ तरीके से न हो पाई।इसके कारण कुचल दी गई। लेकिन अब भारतीयों ने अंग्रेजों से लोहा लेना सीख लिया था।1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना हो गई। इसमें उस समय के सारे भारतीय जो ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के विरुद्ध थे। इकट्ठे हो गए।फिर महात्मा गांधी भी साऊथ अफ्रीका से भारत लौट आए।वो भी कांग्रेस में शामिल हो गए। महात्मा गांधी की सबसे अच्छी बात ये थी।कि वो अपने असुलों पर अडिग रहते थे।सत्य और अहिंसा का पालन करते थे।एक धोती पहनते थे।सादा जीवन जीते थे।बकरी का दुध पीते थे।सब भारतीयों को लगने लगा।कि ये व्यक्ति हम में से एक है।लोग उनसे जुड़ने लगे पड़े। कांग्रेस में भी जो कुलीन घरानों के लोग थे।वो भी महात्मा का अनुसरण करने लगे।और विदेशी वस्तुओं को त्याग कर। स्वदेशी उपयोग में लाने लगे। किसानों ने मानचेस्टर की मीलों को कच्चा माल देना बंद कर दिया।जिससे मीलें बंद हो गई।उधर स्वतंत्रता आंदोलन जड़ें मजबूत करने लगा।अब पुरे देश में लोग महात्मा के साथ जुड़ चुके थे।इसी बीच बापू ने असहयोग आंदोलन की घोषणा कर दी।पुरे भारत में अंग्रेजों का विरोध हो रहा था।लोग विदेशी का बहिष्कार कर रहे थे।इसी बीच सुभाषचंद्र बोस कांग्रेस से अलग हो गए। क्योंकि वो बापू की अहिंसा की निति से सहमत नहीं थे। उन्होंने आजाद हिन्द फौज भारतीय सैनिक जो दुसरे विश्व युद्ध के बाद जेलों में जापान और जर्मनी में बंद थे। उनको लेकर बना डाली।और ब्रिटिश इंडिया पर आक्रमण कर दिया। उन्होंने अंदमान द्वीप को आजाद करवा लिया। वहां भारतीय सरकार स्थापित कर दी। जापान और जर्मनी ने इस सरकार को मान्यता दे दी। इसी बीच अमेरिका ने जापान पर एटम बंब फोड़ दिया। जिससे जापान जो की सुभाषचंद्र बोस की मदद कर रहा था।वो बंद हो गई।और आजाद हिन्द फौज को अंग्रेज कुचलने में कामयाब हो गए। लेकिन दुसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश शासन भी काफी कमजोर हो गया था।अब अंग्रेजों को लगता था।कि अब भारत को अपने अधीन रखना संभव नहीं होगा।सारे भारत में " अंग्रेजों भारत छोड़ो" का नारा बुलंद था।इसी बीच मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग रख दी।पहले तो कोई इस बेतुकी बात के लिए तैयार नहीं था। लेकिन जब उनको लगा।कि अगर विभाजन न हुआ।तो बहुत खुन खराबा होगा।आखिर सारे स्वतंत्रता सेनानियों के अनथक प्रयासों के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया।