बहुत बुरे हुनर आजमाए मैने
बहुत बुरा कभी नहीं बन पाया
अच्छे कहलाने की भी चाहत नहीं
बस बुरी नज़रों से बचना चाहता हूं।
शौक बड़े बड़े हैं
पर बहुत छोटा है जीवन
इस छोटे से जीवन में ही
कुछ कर गुजरना चाहता हूं।।
है चांद जो नभ में
बालकनी से थोड़ी दूरी पर
गिन रहा है सारे लोगों के गम
उसके संग बातें करना चाहता हूं।।
स्याह को साथी बनाना
फिर उसी रंग में रंग जाना
दीन दुखियों को गले लगाना
इससे ज्यादा क्या चाहता हूं।।
- अनिकेत


