मैं सागर? से भी गहरा हूँ

, तुम कितने पत्थर फेकोगे,


मैं अंगारों पर भी चल सकती हूँ

तुम कितने ?आग लगावोगे,

न रूकुंगी, न थकुंगी, तुम कितने काटे बिछाओगे,

हार कर जीतने के सपने लिए मैं पल पल कदम बढाउंगी

, मैं सागर से भी गहरी हूँ, तुम कितना पीछे खिचोगे

न रूकुंगी, न थकुंगी, तुम कितने काटे बिछाओगे,


हार कर जीतने के सपने लिए मैं पल पल कदम बढाउंगी, मैं सागर से भी गहरी हूँ, तुम कितना पीछे खिचोगे ।। ? Anchal yadav ?