आशियां ये उन्हें कुछ इस कदर भाने लगा,

हर मकाँ में अब मिरा ही घर नज़र आने लगा।


खटखटा ना लें कहीं दर दूसरा ये थी हिचक,

सोच वो अंजाम दिल से दूर है जाने लगा।


खुद तमाशा बन पड़ेगी भीड़ है काबिल बड़ी,

सो रही बेखौफ ये तू एक दो ताने लगा।


ले बदल तू लीक अपनी रास्ता खुद ही बना,

राहबर ही राह का ख़ार है खाने लगा।


सच किताबों में लिखा कानून भी होगा सही,

जो बुजुर्गों को यहां बेघर किया जाने लगा।


अक्स भी मेरा यहां मुझसे तिजारत कर गया,

आइने में राज सारा ही नज़र आने लगा।


'आंच' तुझको भी लगेगी आग जो दिल में उठी,

आदमी कब का मरा तू क्या कहर ढाने लगा।