सुप्रसिद्ध शोध जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार जब दोनों जीवनसाथी अपने-अपने करियर, ऑफिस के काम और घरेलू जिम्मेदारियों के लिए समान रूप से समर्पित होते हैं, तो वे आर्थिक स्वतंत्रता में वृद्धि, अधिक संतोषजनक जीवनशैली और रिश्ता प्राप्त करते हैं। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि दोनों अपने साथी को प्रोत्साहित करें, उसकी मदद करें और उसके हर कदम पर उसका साथ दें... लेकिन कितने लोग 'सपोर्ट' कर पाते हैं?
‘एना, तुमने वो नया विडियो देखा जो मेरे दोस्त ने बनाया?’
‘हां... इससे याद आया, आज मुझे एक न्यूज़ पोर्टल से भी फ़ोन आया था, वो मुझे न्यूज़ एंकर के जॉब के लिए बुला रहे हैं। वैसे तो मैंने कहा है कि मेरे पास पहले से अच्छी जॉब है, तो मैं वीकेंड पर स्पेशल स्टोरी कर सकती हूँ। स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया है दो दिन बाद‘न्यूज़ एंकर? और तुम? वैसे देखा जाए तो तुम अभी वाली जॉब छोड़ कर वो कर सकती हो। समय कम हो जाएगा जॉब का, घर पर कम से कम ध्यान तो दोगी तुम...‘पहले भी की है मैंने न्यूज़ एंकरिंग। और वैसे घर पर ध्यान तुमसे तो ज्यादा ही है। देखो आज सारा काम निपटा कर भी ये पेंटिंग बना ली मैंने... अच्छी है न?’‘ह्म्म्म... खाना लगा लो तुम तो...’
‘आज पता है एक आर्टिकल लिखा था, पोस्ट भी किया था। काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली लोगों से...’
‘ह्म्म्म... किताब ही लिख लो तुम तो... और वैसे तुम जॉब छोड़ कर यही करो। फ्रीलांस करने लग जाओ... मेरी एक दोस्त है, वो भी फ्रीलांस करती है। आराम से घर पर रहती है दिनभर। घर संभालती है। तुम भी ये 10-12 घंटे की नौकरी छोडो और घर पर रह कर फ्रीलांस करो। तुमको मैं क्लाइंट दिलवा दूंगा कंटेंट राइटिंग के लिए। मेरी वो दोस्त भी काफी कमा लेती है।’‘नहीं आदि... मुझे मेरी यही जॉब प्यारी है।.. समय ज्यादा है तो क्या हुआ... ख़ुशी मिलती है।..’
‘ख़ुशी? थकी हुई तो आती हो रोज़... क्या मतलब? फ्रीलांस करो घर बैठ के, पैसे भी मिलेंगे और घर पर ध्यान भी रहेगा तुम्हारा। और घर के काम करोगी तो प्रेक्टिस भी होगी काम करने की और थोड़ी एक्सरसाइज भी होगी‘तुम हमेशा किसी न किसी तरह मेरी जॉब छुडवाने की कोशिश क्यों करते हो, आदि? मैं ऑफिस और घर दोनों मैनेज कर रही हूँ न? क्या दिक्कत है? पसंद है मुझे यही जॉब। फ्रीलांस करुँगी तो इस जॉब के साथ ही करुँगी वरना घर तो नहीं बैठने वाली मैं।’
‘घर बैठने को कौन कह रहा है? हाउस-वाइफ सबसे अच्छी मेनेजर होती है पता है... मेरी मम्मी को देखो... दिनभर कितना काम मैनेज कर लेती हैं। घर बैठी थोड़ी न हैं। और तुम उसके अलावा बाकि फ्रीलांस कर लेना। वैसे भी तुमको तुम्हारे ऑफिस वाले न तो कभी सैलरी बढ़ाएंगे, न प्रमोट करेंगे। उसके लिए उतना काबिल भी होना चाहिए। क्या फालतू इधर-उधर दिमाग लगा रही हो? कभी न्यूज़ एंकरिंग, कभी कंटेंट, कभी ब्लॉग, कभी पेंटिंग, कभी कहीं स्पीकर बन के जाना? फोकस्ड नहीं हो तुम..‘तुमको ऐसे क्यों लगता है आदि, कि घर बैठ कर फ्रीलांस करना इस सबका हल है?’
‘करो तुमको जो करना है, मैं तो बस सपोर्ट कर रहा था...’
क्या कभी मर्द अपनी पत्नी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते? या प्रोत्साहित करने का दिखावा कर उन्हें घर बैठाना चाहते हैं? क्या ‘सपोर्ट’ के नाम पर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होते देखना उनके अहम् को ठेस पहुंचता है? ये सभी ‘कही-अनकही’ बातें हैं और इसका सच वे ही जानते हैं। हालाँकि, एना ने वही निर्णय लिया जो उसे ठीक लगा। आप क्या करते?


