एना एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर है और आदि आईटी कंपनी में नौकरी करता है। दोनों एक दूसरे को काफी समय से जानते हैं और उनका हाल ही में विवाह हुआ था... और एना और आदि दोनों ही बहुत खुश थे। एना के घरवाले भी बहुत प्रसन्न थे। खुश तो शायद आदि के घरवाले भी रहे होंगे... कि चलो, आदि ने शादी तो की... भले ही अपनी पसंद से। लेकिन यह विचारधारा अब भी थी, कि हम शादी करवाते तो अपनी पसंद से ‘परफेक्ट’ बहू लाते, लेकिन फिलहाल तो एना से ही काम चलाना पड़ रहा था...

एना आदि और उसके परिवार का बहुत ध्यान रखती थी- उसके माँ-पिताजी, बहन-जीजाजी, दीदी के बच्चे, नाते-रिश्तेदार... इत्यादि। आदि भी वैसे तो बेहद नम्र और सहृदय था लेकिन बस एना के मन की बात समझने में अब तक सफल नहीं हो सका था। या शायद उसे भय था, कि अगर एना से ज्यादा बात करेगा, या उसके साथ ज्यादा वक़्त बिताएगा तो घरवाले ताना देंगे कि शादी होते ही हमारा लड़का बदल गया...

चूँकि एना डॉक्टर थी और कोरोना काल में उसकी जिम्मेदारियां और भी अधिक थी, इसलिए बहुत कम छुटिटयों के बीच बमुश्किल हनीमून का प्लान हुआ तो लगे हाथ आदि की अनु दीदी ने भी अपने पति और नन्हे-नन्हे दो बच्चों को लेकर मनाली साथ चलने का प्लान बना लिया। मनाली की खूबसूरत वादियों में जहां एना आदि के साथ अस्पताल और घर के काम की चिंता छोड़ कर घूमना और अकेले वक़्त बिताना चाहती थी, वहीं आदि पूरे समय बहन अनु के दबाव में रहा; कि कहीं दीदी को ऐसा न लगे कि आदि और एना उसे नज़रंदाज़ कर रहे हैं। लिहाजा पूरे हनीमून(?) में आदि अपनी बहन के बच्चों को खिलाता रहा, उन्हें लेकर घूमता रहा ताकि दीदी-जीजाजी अकेले वक़्त बिता पाएं, दीदी-जीजाजी के साथ खाता-पीता रहा, जीजाजी के हर आदेश का पालन करने में लगा रहा और एना चुपचाप बैठ कर सिर्फ सब कुछ देखती रही और आंसू रोक कर मुस्कुराती रही।

होटल में भी कहने को तो दो कमरे लिए गए, लेकिन आदि आधी रात तक बहन के ही कमरे में ताश खेलता रहा और एना को उसके कमरे में यह कहकर भेज दिया, कि तुम थक गयी होगी, सो जाओ। एना कमरे में अकेले बैठ कर अपने सोशल मीडिया पर पूरे परिवार के साथ मनाए जा रहे इस हनीमून के फोटो अपलोड करती रही... आंखों से टप-टप बरसती बूंदों के साथ लाइक-लव और कमेंट्स का जवाब देती रही... उसकी कई सहेलियों ने इनबॉक्स में मैसेज भेज कर छेड़ा भी – ‘पागल है क्या? हनीमून पर इतनी रात को सोशल मीडिया कौन इस्तेमाल करता है? आदि नाराज हो जाएगा!’ एना ने मस्ती भरा इमोजी जवाब में भेज तो दिया लेकिन एना जानती थी कि आदि उसके पास तब आएगा जब उसकी बहन और जीजाजी, और उनके बच्चे सो जाएंगे।

वही हुआ भी, चार घंटे तक करवट बदलती एना जब सोने का नाटक कर रही थी, तब आदि आया, और उसके पास उसे गले लगाकर सो गया। कुछ ही पल में आदि खर्राटे ले रहा था, लेकिन एना अन्दर तक टूट चुकी थी।

सवाल यह नहीं है कि आदि को क्या करना चाहिए था या एना को क्या करना चाहिए था... सवाल यह है कि क्या ऐसे अनकहे दर्द कभी समझे और महसूस किए जाते हैं? परिवार के दबाव में आकर ब्याहता पत्नी की भावनाओं का ख्याल आपने शुरू में नहीं रखा तो अनदेखी एक दरार को जन्म आप ही दे रहे हैं... हमेशा के लिए। और क्या परिवार कभी नव-विवाहित जोड़े को अकेले में समय बिताने नहीं दे सकता? अगर आपको अपने बेटे को अपनी पत्नी के साथ समय बिताने से हर्ज़ था, तो शादी करवाई ही क्यों? अगर आप चाहते ही नहीं कि आपका बेटा अपना खुदका परिवार शुरू कर, अपने बीवी-बच्चों की खुशियों के लिए प्रयास करे, तो आपने शादी के लिए उसपर दबाव बनाया ही क्यों? क्या आप अपने बच्चों पर शादी का दबाव मात्र सामाजिक दबाव में आ कर नहीं डाल रहे हैं? क्या आपने शादी भी सिर्फ दिखावे के लिए नहीं की?

बात कईयों को बहुत साधारण भी लग सकती है लेकिन एना के लिए वह जीवन भर का दंश बन गई। हनीमून से आते ही जब एना फिर से कोविड वार्ड में ज्यादा व्यस्त हो गई तो वर्क-फ्रॉम-होम कर रहे आदि की शिकायतें बढ़ने लगी कि एना के पास वक्त नहीं है। एना कहना तो चाहती थी कि ‘वक्त था तब तुम्हें दिखा नहीं आदि’, लेकिन वह बस कोशिश करती रही कि आदि को परेशानी न हो। आदि तो भूल गया कि हनीमून कैसा था, लेकिन एना के दिल में खरोंच के निशान आज भी बाकी हैं।