क्या है ये दोस्ती?? साथ हंसना, समय बिताना, बातें साझा करना, कुछ अच्छे पल बना लेना, क्या सिर्फ यही है दोस्ती?? नहीं!! इससे बहुत परे है दोस्ती।। ईश्वर (श्री कृष्ण) ने भी रखा जिसे ऊपर, समझ ली व्यथा मित्र के दिल पर, शब्दों की सीमा से बाहर, बसे सिर्फ आँखों के भीतर, सबसे निराली, कुछ ऐसी है दोस्ती।। जहाँ वक्त उम्र दूरी का न तकाज़ा, मन की सब बात जहाँ हो साझा, हर पल लगता मधुर व ताजा, दिल जहाँ बच्चों सा सच्चा, सबसे मासूम, कुछ ऐसी है दोस्ती।। सोच-समझ के बात नहीं, कम-ज्यादा का माप नहीं , घाटे-फायदे की सोच नहीं, खुद का कुछ बदलाव नहीं, सबसे अनोखी, कुछ ऐसी है दोस्ती।। झगड़े करीब लाते हैं, हर पल साथ निभाते हैं, अश्क-ऐ-मुस्कान भी लाते हैं, बहुत किस्मत से मिल पाते हैं, सबसे प्यारी, कुछ ऐसी है दोस्ती।। इतना आसान नहीं है यारी, बाधाएं हैं यहाँ बहुत सारी, इक नासमझी पड़ जाती भारी, लगती थोड़ी यहाँ समझदारी, थोड़ी नाजुक, कुछ ऐसी है दोस्ती।। अन्य राय का यहाँ न नाता, जीवन भर का है यह वादा, रखो हमेशा नेक इरादा, मांग है इसकी सबसे ज्यादा, सबसे अनमोल, कुछ ऐसी है दोस्ती।। कब तक मैं युं लिखता रहूँ?? दोस्ती की क्या अब बात कहूँ।। इसके बिन जो जीवन सोचता हूँ, चला जाता है सारा चैन-ओ-सुकूँ।। सबसे जरूरी, कुछ ऐसी है दोस्ती।।