बहुत बड़े हैं ख़्वाब मेरे's image
Poetry2 min read

बहुत बड़े हैं ख़्वाब मेरे

Anand Mohan JhaAnand Mohan Jha October 3, 2021
Share0 Bookmarks 227311 Reads0 Likes

बहुत बड़े हैं ख़्वाब मेरे

पर छोटी सी मजबूरी है

मैं उड़ना चाहता हूँ, पंख फैलाए

पाना चाहता हूँ बिना कुछ गंवाए

ऐसा नहीं है कि मैंने कुछ सोचा नहीं है

पर सच कहूं तो हिम्मत नहीं है

हाँ मैं बुज़दिल हूँ, शायद अपनों की परवाह करता हूँ

सोचता हूँ

कुछ अपने लिए करूँगा तो अपनों का साथ छूट जाएगा

खुद के सपने सजाऊंगा तो अपनों का हाथ छूट जाएगा

 

पर ऐसा भी नहीं है कि मेरा दिल नहीं करता

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts