इश्क़ हमारा ऐसा हो 

जैसे की इक खुमारी हो 

दीद तुम्हारी ऐसी हो के 

जैसे ख़ुदा की दीदारी हो 

मौन हमारा ऐसा हो के 

बाते बस इज़हारी हो 

आँखों की जुगलबंदी हो  

और गरम चाय की प्याली हो 

जब बोल पड़े लब दोनों के 

तो हंसती हुईं ये क़ायनात सारी हो

~~Anand Singh