युद्ध को लेकर लोग अब गणितीय भाषा का प्रयोग करने लगे हैं
कुर्बान होने वालो को गिनती में समेटने लगे हैं,
मांगते हैं लोग हुकूमत से उनकी जान का हिसाब ,
शायद नहीं पलटते वो अपने ज्ञान का किताब,
आज कल लोग चर्चाओं में ही देशभक्ति दिखाते हैं ,
जब बात इनके खुद पे आती है हर चीज़ सस्ती बताते हैं,
क्या इतनी ही कीमत है त्याग, संघर्ष और बलिदान से सने ईन कर्मवीरो की,
सियासत के जाल में लोग ख़ुद उन्हें फंसाते हैं,
अपने आप को उनका हमदर्द बताते हैं,
इन्ही लोगों ने पराक्रम के प्रतीकों को नासाज़ किया है
पनपते हुए मुल्क को कतरा कतरा बर्बाद किया है,
राजनीति से परे ये जवान हैं देश के
हुकूमत से परे ये अभिमान हैं देश के...


