अब क्यू ना कुछ ऐसा किया जायेज़िंदगी को इक तजुर्बा दिया जायेलड़ा जाये संघर्षों से सुबहो शामज़िंदगी को दिया जाए इक नया आयाम
अब क्यू ना कुछ ऐसा किया जायेज़िंदगी को इक तजुर्बा दिया जाये
लड़ा जाये संघर्षों से सुबहो शामज़िंदगी को दिया जाए इक नया आयाम