ख़्वाब और हकीक़त के कई घुट पिये जा रहा है,

वो अपनी मौत को देख के भी ना क़तरा रहा है,

कर रहा है जद्दोजहद ज़िंदगी से सुबह शाम,

दे रहा है ख़ुद की ज़िंदगी को हर रोज इंतकाम,

वो इंसान हैं जनाब उम्मीदों को लिए हर चुनौती से टकरा रहा है