तुम बोलो ऐसी आदत का क्या करोगे
तड़पते रहोगे अंदर से तो शराफत का क्या करोगे
अगर सोचते हो तुम कि मिसालें दी जायेगी तुम्हारी
ये तो वही बात हुई ना की कोई काम सरकारी
ऐसी वाहवाही का क्या काम जो बस दूसरों के मुह से सुनी जाए सुबह शाम
करो कुछ ऐसा की खुद को हैरत हो ख़ुद पे
अकेलेपन में भी बस अन्तर्मन बोल उठे की मुझे नाज है तुझ पे !


