खेती की राजनीति
खेती की राजनीति या कहो
राजनीति में खेती जारी है
किसान खड़ा है सड़कों पर
एक एक दिन उस पर भारी है
गतिरोध के हल चल रहे
बात अहम की आई है
कौन किस पर है भारी
ये चल रही लड़ाई है
हम सब यही है चाहते
मेघ संधि के बरस जाए
किसान बने समृद्धिशाली
फसल उसकी लहलहाऐ
हर पक्ष से है यह निवेदन
बीज नफरतों के ना बोये
हम सब पहले भारतीय हैं
राष्ट्रहित की फसल संजोये
रचयिता :: आनंद गोलछा


