चाहिए इक कठपुतली ही, लेकिन उसमें प्राण होना चाहिए...

आशाओं का दीपक, कर्तव्यों की ज्योति उसमें तो ज़िम्मेदारियों का जहान होना चाहिए...

"हमारी लाज है तुमसे " से लेकर "बहुत अरमान है तुमसे " तक,

उम्मीदों का बोझ लेकर भी, पंछियों सी उड़ान होना चाहिए...

गर हो किसी से नाराज़गी, या हो कोई ख़लिश,

चाहे मन में हो तूफ़ान, चेहरे पर शीतल मुस्कान होना चाहिए...

सोचे, समझे, चाहे वो कुछ भी...है किसे परवाह,

करे वही जिससे सबका सम्मान होना चाहिए...

ना जाने गर वो बनना संवरना, ना चाहे गर एक और गुन सीखना,

ऐसे कैसे चलेगा...

हर तरह से हो सर्वगुण संपन्न, बे-ऐब

उसे तो अनकहा सजावटी सामान होना चाहिए...

गाँव से लेकर परदेश तक जाने, सीता से लेकर सुनीता (विलियम्स) तक के हुनर ना हो उससे अनजाने,

हमारी गुड़िया रानी को सबकी जान होना चाहिए...

चाहिए इक कठपुतली ही, लेकिन उसमें प्राण होना चाहिए...


- अनामिका 'अनु'