आसान नहीं है एक बार उजड़ कर फिर से बस जाना, किसी तूफ़ान के गुजर जाने के बाद
बेरहम लहरों में धुल कर खो चुकी सारे रंग, बदरंग जिन्दगी गर चाहती हो फिर चटख रंगों में रंग जाना
आसान नहीं है बिखरे रंगों और टूटी कुची से एक खूबसूरत तस्वीर सजाना, एक तूफ़ान के गुजर जाने के बाद
सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा सागर की विकराल लहरें नहीं देखती किनारे खड़े वृक्षों की जिजीविषा,
तोड़ जाना चाहती हैं उनके साथ ही उनके पनपने की इच्छा
आसान नहीं है दर्द की लंबी रात के बाद फिर सुबह मुस्कुराना, एक तूफ़ान के गुजर जाने के बाद
बढ़ चुका है वो तूफ़ान कहीं और तबाही मचाने, करने पूरी मंशा अपने स्वभाव के बहाने
भावनाओं के उफान व मुश्किलों की बौछार में मैं भी संभल गई
आहिस्ता ही सही पर मैं फिर से संवर रही,
बस इतना करम करना प्रभु
सिखला दो इस चंचल मन को शांत बनाकर, आने वाले झंझावतों से कभी ना घबराना
किसी भी तूफ़ान के गुजर जाने के बाद
-अनामिका 'अनु'


