तेरी दी हुई यादों में तेरे भूले हुए वादों में। तेरी धुंदली परछाईं में मांगी हुई मुरादों में। सजदों में नमाज़ों में, तेरे सवालों के जवाबों में। तन्हाई में हज़ारो में मंदिरो में मज़ारों में। बाहों में पनाहों में अश्रु भरी निग़ाहों में। कसमो के तेरे वादों में तन्हा अकेली रातों में। मैं खुश हूं तेरी यादों में मैं खुश हु बीती बातों में।   वो तन्हा चाँद रातों में वो भीगी सी बरसातों में। वो गोरे गाल तेरे मखमले वो दो दो चूड़ी हाथों में। वो तेरी बाहों का गुलशन वो तेरी पायल की छमछम। ज़िन्दगी थी जो तेरे संग बीती बाक़ी सब काँटो का दामन। कभी दूर दराज़ के अपनो में कभी अनसुलझे से नातो में। मैं खुश हूं तेरी यादों में मैं खुश हु बीती बातों में।