जो कर नही सकता मेरे दर्द की दवा।

रहम करे मुझपे वो मेरा हाल न पूँछे।

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तुम साथ अगर होते तो शायद ख़ुशनुमा होता।

लेकिन ये हक़ीक़त है कब का मर गया होता।

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आने को थी हमारे होठों पे भी शराब।

छलका नही गिलास फ़क़त टूट ही गया।

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मर्ज़  हो  गर  तो  दवा  करे  कोई।

जब दवा मर्ज़ हो तो क्या करे कोई।

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तुम्हें  मालूम  नही शायद  मैं  बताता  हूँ।

तन्हा हो तुम फ़ेसबुक ज़ियादा चलाते हो।

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कोई  तो  ऐसा  रास्ता  निकाला  जाए।

दुश्मनों से दोस्ती का शौक पाला जाए।

ख़त आया  है  सभी  के  पास  उसका।

नाम कोई  नही  चाहता  उछाला  जाए।

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मैं तो बहता इक दरिया हुँ।

गर ठहरूँ, ठहरूँ तो कैसे।

साथ मेरे ये आसमान है

रुकना है पर रुकूँ तो कैसे।

सबने अपनी बात कही 

अब मेरी बारी में चुप है।

तुम ही मुझको बतलाओ।

मन की बात कहूँ तो कैसे।

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ये बच्चे मुझसे कुछ सीखते नही।

मेरी तरह बारिशों में भीगते नही।

मेरा  बदला  पूरा  नही  होता।

मेरी गली के बच्चे चीखते नहीं।

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तुम्हारी भी नही जरूरत मुझे।

मुझे कोई दूसरा नही चाहिए।

मैं और मेरी तनहाई, बहुत है।

मुझे कोई तीसरा नही चाहिए।

शायरी, तुम और अधूरा ख्वाब।

फन कोई चौथा नही चाहिए।

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-अमूल्य मिश्रा