किसी टूटी हुई बंसी के टूटे साज़ थे दोनों
भुलाकर भूल न पाओगे वो अंदाज़ थे दोनों
कहीं टकरा गए दोनों ये दिल इक बार फिर धड़का
नज़र ने चूम ली नज़रें नज़रअंदाज़ थे दोनों
-अमूल्य मिश्रा


किसी टूटी हुई बंसी के टूटे साज़ थे दोनों
भुलाकर भूल न पाओगे वो अंदाज़ थे दोनों
कहीं टकरा गए दोनों ये दिल इक बार फिर धड़का
नज़र ने चूम ली नज़रें नज़रअंदाज़ थे दोनों
-अमूल्य मिश्रा