एक तेज जुल्म का तूफ़ान है।एक बेशर्मी की आँधी है
एक अजर अमर सा दानव है। एक लाचार जवानी है।
फिर कुरुछेत्र का मंजर है। फिर पांडव अभिमानी है।
फिर पृथवीराज की गाथा है।फिर जयचंदो की कहानी है।
इस अंधेरी नगरी अब जो भी दीप जलाएंगे।
आने वाले कालचक्र के कुलदीपक कहलायेंगे।
अंधे भक्तों का देश है ये।चौपट राजा की कहानी है।
हर पद्मा पे एक ख़िलजी है। खुद बाबाओं की ज़ुबानी है।
गीता क़ुरान सब भूल गए। अपनी अपनी मनमानी हैं।
सब ध्रितराष्ट्र बन बैठे है। सब शर्म से पानी पानी है।
इन कायरों की भीड़ मे से अब जो तलवार उठाएंगे।
आने वाले कालचक्र के कुलदीपक कहलायेंगे।
एक टूटा फूटा दर्पण है। एक नकाबपोश सा प्राणी है
सबका दोतरफा चेहरा है। सबको सूरत दिखलानी है।
एक आग लगी है मज़हब की। वो आग हमे ही बुझानी है।
हम नए सूर्य है कल के। हम को नई सुबह फिर लानी है।
इन भूले भटके लोगों को अब जो भी राह दिखाएंगे।
आने वाले कालचक्र के कुलदीपक कहलायेंगे।
जो प्रश्न उठाये शहीदो पर। निश्चित ही वो अज्ञानी है
मूल्यांकन करना वीरों का। हरकत ही बेवकूफानी है।
जो प्राण गवाँ दे सरहद पर।वो अजर अमर बलिदानी है।
और जो ख़ून न खौला शहादत पर वो ख़ून नही है पानी है।
जो वीर शहीदों की कुर्बानी पर नित नित शीश झुकायेंगे।
 
वे आने वाले कालचक्र के कुलदीपक कहलायेंगे।