
तू कविता है अंतर्मन की
तेरा क्या उल्लेख करूँ
भूरी आँखे गाल गुलाबी
सोने के जैसे हैं बाल
कमर है तेरी मछली जैसी
हिरनी जैसी तेरी चाल
चूम लूं तेरे माथे को और
मस्तक का अभिषेक करूँ
तू कविता है अंतर्मन की
तेरा क्या उल्लेख करूँ
छूट गया जो पीछे छोड़ो
और राह पर बढ़े चलो
हवा के रोके तुम न रुकना
रुख़
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