चार पल जो साथ हैं।

हाथों में तेरा हाथ हैं।

रब से बड़ी ये दोस्ती।

दो चार दिन की बात है।

तुम साथ हो तो लूट ले।

आओ चलो सारा जहाँ।

फिर तुम्हारी ये जमीं 

और मेरा आसमाँ।

कौन जाने क्या ख़बर कल

हम कहाँ और तुम कहाँ।

 

ज़िंदगी है इक सफ़र।

हम हमसफ़र एक दूसरे के।

खामखाँ की दौड़ है।

सब बेखबर एक दूसरे से।

दौड़ से बाहर निकल।

आओ लिखे एक दास्ताँ।

फिर तुम्हारी ये जमीं 

और मेरा आसमाँ।

कौन जाने क्या ख़बर 

कल हम कहाँ और तुम कहाँ।

 

जैसे गुल तितली से मिलता।

आओ वैसे हम मिले।

छोड़ कर शिकवे गिले।

हम दोनों लग जाए गले।

फिर न सूनी महफिलें हो।

न हो सूना ये समाँ।

फिर तुम्हारी ये जमीं 

और मेरा आसमाँ।

कौन जाने क्या ख़बर 

कल हम कहाँ और तुम कहाँ।

 

हमनें सांसे गिन के ली हैं।

ज़िंदगी किश्तों में जी।

जुगनुओं को शम्स बोला।

जब बढ़ी है तीरगी।

आओ हम मिलके बनाले।

अपना इक दूजा जहाँ।

फिर तुम्हारी ये जमीं 

और मेरा आसमाँ।

कौन जाने क्या ख़बर 

कल हम कहाँ और तुम कहाँ।

-अमूल्य मिश्रा