"एक साल जीवन का कम हुआ।
घर में उत्सव की पुरवाई।
जन्मदिवस फिर आया मेरा।
देने लगे लोग बधाई।
उपहार मिले आशीष मिले।
मानो स्वयं जगदीश मिले।
फिर अगले दिन वही कुतरपात।
वही दुनिया की मुक्का लात।
हम ख़ुश हैं मानो साल कट गया।
थोड़ा और जंजाल कट गया।
जन्मदिवस सब कुछ नही होता।
तुमने जीवन की किश्त चुकाई।
हमे ज़िन्दगी रास न आई।