जिंदगी को आज़मा लो।
मौत से आंखे मिला लो।
इक ज़हर है जिंदगी भी।
रोज़ मरने की दवा लो।
आदमी चालाक हो गर।
बेवफ़ाओं से वफ़ा लो।
इक सितम है,आशिक़ी भी।
दूर से इसका मज़ा लो।
डूबने में ही खुशी है।
साहिलों से इत्तला लो।
-Amulya Mishra


जिंदगी को आज़मा लो।
मौत से आंखे मिला लो।
इक ज़हर है जिंदगी भी।
रोज़ मरने की दवा लो।
आदमी चालाक हो गर।
बेवफ़ाओं से वफ़ा लो।
इक सितम है,आशिक़ी भी।
दूर से इसका मज़ा लो।
डूबने में ही खुशी है।
साहिलों से इत्तला लो।
-Amulya Mishra