मैंने पूछा आसमाँ से क्या है ज़मी की दशा।
और फिर दशा बड़े जुनून से लिखी है।
कोई दस पंद्रह मिनट में नही लिखी है।
लिखी एक पंक्ति पर सुकून से लिखी है।
आके यहाँ ऐसे वैसे कुछ भी सुनाने लगे।
मैंने कविता नियम कानून से लिखी है।
ऐसी किसी जगह पे कुछ न सुनाऊँगा मैं।
मैंने कविताएं अपने खून से लिखी है।
 
-अमूल्य मिश्रा