इश्क़ न हो अगर तुझे तो रिहा कर मुझको।
इश्क़ गर है तो वफ़ा मेरी अता कर मुझको।
जो कोई और है पसंद तो इज़ाज़त है।
नई दुनिया बसा ले और दफा कर मुझको।
तुम्हारे वास्ते क्यों धड़कने धड़कती है।
शौक से जा तू मगर राज़ बता कर मुझको।
मैं अबकी बार जो टूटा तो बिखर जाऊँगा।
मुझे बचा ले तू गले से लगा कर मुझको।
-अमूल्य मिश्रा


