हमारी इतनी सी पहचान है बस ले दे कर

हमारे पास फ़क़त जान है बस ले दे कर


ख़ुदा भी देख के हैरान है की दुनिया में

वजूद उसका एक इंसान है बस ले दे कर


तवाफ़ करती हैं यादें तेरी रूहों की तरह

ये सारा शह्र बयाबान है बस ले दे कर


मिसाइलों की तिज़ारत से खुला है मुझपे

जहान जंग का मैदान है बस ले दे कर


हमारे  बाद  हमारी भी कमी सबको खले

यही एक आख़िरी अरमान है बस ले दे कर


हमारे पास मुहब्बत के सिवा कुछ भी नही

ये एक मीर का दीवान है बस ले दे कर


हरेक शख्श के हैं अपने मसाइल "मिश्रा"

हरेक शख्श परेशान है बस ले दे कर


- अमूल्य मिश्रा / Amulya Mishra