हमारे चाहने वाले रहे थे दोनों तरफ़
लकीर खैंची गयी हम खड़े थे दोनों तरफ़
ख़ुदा के नाम पे इक भीड़ ने हमें काटा
कटे भी ऐसे कि कटकर गिरे थे दोनों तरफ़
वो अस्पताल में आयी थी देखने मुझको
तमाम ज़ख़्म वहीं भर गये थे दोनों तरफ़
ख़ुदा का कर्म मुहब्बत है, कहने वाले लोग
कटार हाथ में लेकर खड़े थे दोनों तरफ़
छिड़ी थी जंग बहुत पहले रौशनी के लिए
चराग़ जलते हुये बुझ गये थे दोनों तरफ़
जहाँ पे राह में छोड़ा था आपने मुझको
वहीं से रास्ते कटने लगे थे दोनों तरफ़
- अमूल्य मिश्रा
