बढ़ते हुए कदम ये अचानक से रुक गए।उत्साह से भरे ये मेरे शीश झुक गए।कैसे मना लूं शौक से बताओ दीवाली।जबकि दशहरे पे कई दीप बुझ गए।
बढ़ते हुए कदम ये अचानक से रुक गए।उत्साह से भरे ये मेरे शीश झुक गए।
कैसे मना लूं शौक से बताओ दीवाली।जबकि दशहरे पे कई दीप बुझ गए।