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Diwali/दीपावली


बढ़ते हुए कदम ये अचानक से रुक गए।उत्साह से भरे ये मेरे शीश झुक गए।

कैसे मना लूं शौक से बताओ दीवाली।जबकि दशहरे पे कई दीप बुझ गए।

— अमूल्य मिश्रा
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